43 की उम्र में टेनिस को कहा अलविदा, Rohan Bopanna बने सबसे उम्रदराज वर्ल्ड नंबर वन खिलाड़ी

भारत के स्टार टेनिस खिलाड़ी Rohan Bopanna ने आखिरकार अपने शानदार करियर को अलविदा कह दिया है। 43 साल की उम्र में मिक्स्ड डबल्स में विश्व नंबर 1 बनने वाले वे सबसे उम्रदराज़ खिलाड़ी बने थे। अब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा करते हुए अपने संन्यास की घोषणा की। बोपन्ना का यह कदम खेल जगत के लिए एक भावुक क्षण बन गया।
कोर्ग से शुरू हुई थी टेनिस की कहानी
बोपन्ना ने अपनी पोस्ट में लिखा, “कैसे अलविदा कहूं उस चीज़ को जिसने मेरी ज़िंदगी को अर्थ दिया।” उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा कोर्ग के एक छोटे से कस्बे से शुरू हुई थी, जहां वे अपनी सर्विस सुधारने के लिए लकड़ियां काटते थे और कॉफी के बागानों में दौड़ लगाकर अपनी स्टैमिना बढ़ाते थे। टूटी हुई कोर्ट पर खेलते हुए उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शुमार होंगे।
❤️❤️❤️ pic.twitter.com/IS3scPrwhW
— Rohan Bopanna (@rohanbopanna) November 1, 2025
परिवार को दिया सफलता का श्रेय
रोहन बोपन्ना ने अपने माता-पिता और बहन को अपनी सफलता का असली कारण बताया। उन्होंने लिखा, “मेरे माता-पिता मेरे हीरो हैं। उन्होंने मुझे हर वह चीज दी जिसकी मुझे ज़रूरत थी। मेरी बहन राशिम हमेशा मेरे साथ रही और हर मुश्किल में मेरा हौसला बढ़ाया।” बोपन्ना ने अपने कोच, ट्रेनर, फिजियो और साथियों को भी धन्यवाद कहा। उन्होंने अपने फैंस को विशेष रूप से याद करते हुए कहा कि उनके प्यार ने ही उन्हें हमेशा ऊर्जा दी।
दो ग्रैंड स्लैम खिताबों से चमका करियर
बोपन्ना का करियर भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उनकी उपलब्धियां हमेशा याद रखी जाएंगी। उन्होंने 2017 में गैब्रिएला डैब्रोव्सकी के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीता था। इसके बाद 2024 में उन्होंने मैथ्यू एबडेन के साथ डबल्स ग्रैंड स्लैम जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ वे ओपन एरा में सबसे उम्रदराज़ ग्रैंड स्लैम विजेता बने।
फैंस के दिलों में हमेशा रहेंगे बोपन्ना
रोहन बोपन्ना न केवल एक महान खिलाड़ी हैं, बल्कि उन्होंने अपने अनुशासन, शालीनता और समर्पण से भारतीय टेनिस को नई पहचान दी। उन्होंने यह साबित किया कि उम्र केवल एक संख्या है, अगर जज़्बा मजबूत हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उनका यह विदाई संदेश खेल प्रेमियों के दिलों को छू गया है। भारत के लिए बोपन्ना सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि प्रेरणा हैं।




