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CJI Surya Kant ने प्रदूषण को लेकर किया खुलासा! वर्चुअल सुनवाई पर विचार, 60+ वकीलों के लिए राहत प्रस्तावित

CJI Surya Kant: बढ़ती वायु प्रदूषण की स्थिति के बीच सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी तरह से वर्चुअल मोड में कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बुधवार को बताया कि उन्होंने पिछले दिन लगभग एक घंटे की सैर के बाद खुद को अस्वस्थ महसूस किया। CJI ने कहा कि इस मामले में निर्णय लेने से पहले वह बार से परामर्श करेंगे। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के वकीलों को वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट में यह टिप्पणी तब आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी, जो चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांगी। वरिष्ठ अधिवक्ता ने ऑनलाइन उपस्थित होने की अनुमति का अनुरोध किया और कहा कि उन्हें भीड़भाड़ में सांस लेने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने बताया कि सुबह की सैर के बाद उन्हें असुविधा महसूस हुई और अगले दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

CJI Surya Kant ने प्रदूषण को लेकर किया खुलासा! वर्चुअल सुनवाई पर विचार, 60+ वकीलों के लिए राहत प्रस्तावित

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने प्रदूषण पर चिंता जताई

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने भी इस मामले पर सहमति जताई और कहा, “हमारी उम्र में, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400-500 तक पहुंच रहा है, तो हम इस जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं।” CJI सूर्यकांत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने कल लगभग एक घंटे की सैर की। इसके बाद मुझे अच्छा नहीं लगा।” इस बयान के बाद 60 वर्ष से अधिक उम्र के वकीलों को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट देने पर गंभीरता से विचार किया जाने लगा।

भविष्य में वर्चुअल सुनवाई की संभावना

मुख्य न्यायाधीश के इस बयान के बाद सुप्रीम कोर्ट में यह संभावना बनी है कि गंभीर प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम के कारण वर्चुअल सुनवाई को स्थायी रूप से अपनाने पर विचार किया जा सकता है। वरिष्ठ वकीलों की सुरक्षा और सुविधा के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल स्वास्थ्य संबंधी खतरे कम होंगे, बल्कि न्याय प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण के स्तर लगातार बढ़ने के साथ अदालतों में वर्चुअल सुनवाई का विकल्प भविष्य में और व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है।\

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