राजस्थान

Dharmendra Death News: धर्मेंद्र की राजनीतिक कहानी—ऐसी कौन-सी बातें थीं जिनसे संसद भी उन्हें रोक ना पाई?

Dharmendra Death News: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और “ही-मैन” कहलाने वाले धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार, 24 नवंबर को उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार थे और कुछ दिनों पहले तक अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें घर लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। धर्मेंद्र का जाना सिर्फ फिल्म जगत के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक गहरा सदमा है। छह दशक से अधिक समय तक उन्होंने अपने अभिनय, सादगी और जादुई स्क्रीन प्रेज़ेंस से लोगों का दिल जीता।

धर्मेंद्र ने अपने शानदार फिल्मी करियर के बीच राजनीति में भी हाथ आज़माया था। 2004 में वे भाजपा के ‘स्विंग इंडिया’ अभियान से प्रेरित होकर राजनीति में आए। इसी दौरान शत्रुघ्न सिन्हा के साथ उनकी LK आडवाणी से मुलाकात हुई, जो उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत बनी। भाजपा ने उन्हें राजस्थान की बीकानेर लोकसभा सीट से टिकट दिया। अपनी लोकप्रियता के दम पर धर्मेंद्र ने कांग्रेस प्रत्याशी रमेश्वर लाल डूडी को 60,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराकर लोकसभा पहुंच गए। यह जीत भले ही बड़ी थी, लेकिन उनके राजनीतिक सफर का रास्ता आसान नहीं रहा।

Dharmendra Death News: धर्मेंद्र की राजनीतिक कहानी—ऐसी कौन-सी बातें थीं जिनसे संसद भी उन्हें रोक ना पाई?

कम उपस्थिति और विवादों में घिरा छोटा राजनीतिक करियर

धर्मेंद्र का राजनीतिक करियर केवल पांच वर्ष का था, लेकिन काफी चर्चित रहा। संसद में उनकी कम उपस्थिति हमेशा चर्चा में रही। बीकानेर के लोगों का आरोप था कि वे शायद ही कभी अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा करते थे और फिल्मों की शूटिंग या अपने फार्महाउस में व्यस्त रहते थे। खुद धर्मेंद्र भी राजनीति से खुश नहीं थे। उन्होंने एक बार ‘शोले’ के अपने मशहूर संवाद का हवाला देते हुए कहा था कि अगर सरकार उनकी बात न सुने, तो वे संसद की छत से कूद जाएंगे। हालांकि उनके समर्थक कहते रहे कि धर्मेंद्र ने बीकानेर के लिए कई काम पर्दे के पीछे रहकर किए। लेकिन फिर भी यह सफर उनके फिल्मी करियर जितना सफल साबित नहीं हुआ।

क्यों छोड़ी राजनीति? सनी देओल का खुलासा

2009 में कार्यकाल पूरा होने के बाद धर्मेंद्र ने दोबारा चुनाव नहीं लड़ा और राजनीति से दूरी बना ली। बाद में उनके बेटे सनी देओल ने एक इंटरव्यू में बताया कि धर्मेंद्र को राजनीति बिल्कुल पसंद नहीं थी और वे इससे खुश नहीं थे। स्वयं धर्मेंद्र भी कई बार कह चुके थे, “मैंने काम किया, लेकिन श्रेय किसी और को मिलता रहा… शायद वह जगह मेरे लिए बनी ही नहीं थी।” इसके बाद भी परिवार राजनीति में सक्रिय रहा—सनी देओल एक बार गुरदासपुर से MP बने और फिर राजनीति से हट गए, जबकि हेमा मालिनी मथुरा से तीन बार सांसद चुनी गईं। लेकिन धर्मेंद्र ने खुद राजनीति से हमेशा दूरी बनाए रखी। उनका यह छोटा लेकिन चर्चित राजनीतिक सफर आज भी लोगों को याद है।

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