
राजस्थान के टोंक जिले से शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय लतीफगंज में पदस्थ शिक्षिका पिंकी मीणा पर आरोप है कि उन्होंने चार साल तक स्कूल का मुंह तक नहीं देखा और फिर भी 24 लाख 76 हजार 520 रुपये की सैलरी और बोनस लेती रहीं. यह खेल सालों तक बिना किसी रोकटोक के चलता रहा और किसी अधिकारी को भनक तक नहीं लगी.
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने अब इस पूरे मामले में पुलिस से शिकायत की है. शिकायत में कहा गया है कि महिला टीचर साल 2010 से 2014 तक पूरी तरह अनुपस्थित रहीं लेकिन फिर भी वेतन जारी होता रहा. यह वेतन सीधे उनके बैंक खाते में जाता था जिसे वह एटीएम से निकालती थीं. इतना ही नहीं जांच में यह भी सामने आया है कि वह आठ साल के कार्यकाल में कई बार बिना सूचना के स्कूल से गायब रहती थीं.
कोतवाली थाना अधिकारी भंवरलाल वैष्णव ने बताया कि अब मामले की जांच की जा रही है. जांच में कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध लग रही है. शुरुआती जानकारी के अनुसार तत्कालीन भुगतान अधिकारी और बीईईओ रामरतन बैरवा ने भी नियमों की अनदेखी करते हुए सैलरी पास की थी. अब पुलिस सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी.
वहीं सीबीईओ लाली जैन ने बताया कि पिंकी मीणा को विभाग ने पहले ही बर्खास्त कर दिया है जबकि आरोपी अधिकारी रामरतन बैरवा रिटायर हो चुके हैं. फिलहाल महिला टीचर कहां है इसका कोई पता नहीं चल पाया है. शिक्षा विभाग ने माना है कि यह गंभीर लापरवाही का मामला है और अब इसकी विस्तृत जांच की जाएगी.
यह घटना न केवल विभाग की निगरानी प्रणाली की पोल खोलती है बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे सरकारी व्यवस्था में वर्षों तक किसी की अनुपस्थिति पर कोई सवाल नहीं उठाया गया. अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि जांच के बाद इस घोटाले के जिम्मेदारों को क्या सजा मिलती है.






